उपमंडल बालीचौकी में पीपल फॉर हिमालयन डेवलपमेंट (पीएचडी) द्वारा पंचायत माणी, खूहण, सुधराणी एवं देवधार की ग्राम सभाओं के सदस्यों के लिए वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत व्यक्तिगत वन अधिकार (आईएफआर) दावों को लेकर एकदिवसीय हैंडहोल्डिंग कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला में विशेष रूप से उन पात्र ग्रामीणों को मार्गदर्शन दिया गया, जिन्होंने अपने व्यक्तिगत वन अधिकार दावे तैयार कर लिए हैं और अब उन्हें वन अधिकार समितियों (एफआरसी) के समक्ष प्रस्तुत करने की प्रक्रिया में हैं।
पीएचडी के अविनाश शर्मा ने बताया कि यह कार्यक्रम पूर्व में आयोजित जागरूकता एवं क्षमता-वर्धन कार्यशालाओं की निरंतरता में आयोजित किया गया है। हैंडहोल्डिंग सत्र के दौरान दावों के प्रपत्रों, प्रमाण-पत्रों एवं संलग्न दस्तावेजों की बारीकी से जांच की गई। अपूर्ण प्रपत्रों को पूरा करने में सहयोग किया गया। कार्यशाला में कुल 40 प्रतिभागियों ने भाग लिया और 40 दावा फाइलों की जांच कर कमियों को सूचीबद्ध किया गया। इन्हें इसी सप्ताह संबंधित एफआरसी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
कार्यशाला में पीएचडी के प्रबंध निदेशक संदीप मिन्हास, पूर्व जिला परिषद सदस्य एवं डीएलसी सदस्य संत राम तथा बीडीसी सदस्य टोहली राम विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस दौरान ग्रामीणों ने बताया कि कई पात्र परिवार बेदखली के भय से दावे प्रस्तुत करने में संकोच कर रहे हैं।
इस पर संदीप मिन्हास ने स्पष्ट किया कि वन अधिकार अधिनियम की धारा 4(5) के तहत पात्र दावेदारों को सुरक्षा प्राप्त है और दावों की प्रक्रिया पूरी होने तक उन्हें बेदखल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा एसडीएलसी तथा डीएलसी के गठन की प्रक्रिया जारी है, जिसके सितंबर माह में पूरा होने की उम्मीद है।
उन्होंने बताया कि सामुदायिक वन अधिकार (सीएफआर) एवं सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (सीएफआरआर) के दावों की प्रक्रिया भी समानांतर रूप से जारी है और अब तक 20 वन अधिकार समितियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
कार्यशाला में पीएचडी टीम की इंदु देवी, ईश्वर सिंह एवं सुशील भारती ने सक्रिय सहभागिता की।
