5 सितंबर को मंडी में सांसद कंगना रनौत की अध्यक्षता में आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक के बाद सियासी पारा गरमा गया है। बैठक के दौरान अधिकारियों के प्रति सांसद के कड़े तेवर और कथित तल्ख टिप्पणियों को लेकर जहां एक तरफ सामाजिक संगठनों और सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना हो रही है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता व कार्यकर्ता सांसद के इस सख्त रुख का खुलकर समर्थन कर रहे हैं।

‘अधिकारियों से बात करने का यह तरीका अनुचित’: गुमान सिंह
हिमालय नीति अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुमान सिंह ने मंडी में आयोजित प्रेस वार्ता में सांसद के सार्वजनिक आचरण पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने सांसद के व्यवहार को अशोभनीय बताते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि का पद गरिमा और संयम की मांग करता है। अधिकारियों और जनता से तू-तड़क या अनुचित लहजे में बात करना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है।

गुमान सिंह ने कहा कि जनता को जमीनी स्तर पर विकास कार्यों का हिसाब चाहिए, न कि मंचों पर आक्रामकता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आज के दौर में अधिकांश नेता और प्रशासनिक तंत्र जनहित की अनदेखी कर व्यक्तिगत हितों के दबाव में काम कर रहे हैं, जिससे व्यवस्था पंगु हो रही है।
सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग, प्रशासनिक समझ पर उठे सवाल
बैठक से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सांसद के रुख को लेकर मिली-जुली और तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। खासकर सभागार में अधिकारियों के प्रति इस्तेमाल की गई भाषा और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े संवाद को लेकर इंटरनेट यूजर्स उन्हें लगातार ट्रोल कर रहे हैं। आलोचकों का तर्क है कि समीक्षा बैठकों में जवाबदेही तय करने का एक गरिमापूर्ण तरीका होता है।
भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह, बोले— ‘लापरवाह अफसरों पर ऐसी ही सख्ती जरूरी’
दूसरी ओर, भाजपा खेमे में सांसद के इस आक्रामक अंदाज का स्वागत किया जा रहा है। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं का मानना है कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में सुस्ती बरतने वाले अधिकारियों को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा करना बिल्कुल सही कदम है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक जनहित के मुद्दों पर अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक विकास की गति तेज नहीं हो सकती। सांसद की इस फटकार को भाजपा समर्थक एक साहसिक और आवश्यक प्रशासनिक कदम करार दे
रहे हैं।
