हाल ही में मंडी में आयोजित ‘दिशा’ (DISHA) समिति की बैठक के दौरान सांसद द्वारा खंड विकास अधिकारियों (BDO) के प्रति अपनाई गई भाषा-शैली पर हिमाचल प्रदेश खंड विकास अधिकारी संघ ने कड़ा ऐतराज जताया है। संघ ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सांसद की कार्यशैली और टिप्पणियों पर गहरी असहमति व्यक्त की है।
संघ के अध्यक्ष गोपी चंद पाठक और महासचिव गौरव धीमान ने कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा विकास कार्यों की समीक्षा करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है और संघ इसका स्वागत करता है, लेकिन समीक्षा के दौरान अधिकारियों के सम्मान और मनोबल को ठेस पहुंचाने वाली भाषा का इस्तेमाल खेदजनक है। इससे विभाग में कार्यरत अधिकारियों में निराशा की भावना पैदा हुई है।
आंकड़े रख संघ ने दी सफाई
सांसद द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब में संघ ने जिले में MPLADS (सांसद निधि) के कार्यों के आंकड़े प्रस्तुत किए:
* जिले में कुल 23 कार्यान्वयन एजेंसियों को 237 कार्य (कुल राशि ₹511.71 लाख) स्वीकृत हैं, जिनमें 12 बीडीओ कार्यालयों के अधीन 212 कार्य (राशि ₹399.59 लाख) आते हैं।
* इनमें से बीडीओ कार्यालयों के स्तर पर 57 कार्य पूर्ण हो चुके हैं और 142 कार्य प्रगति पर हैं। यानी लगभग 94% स्वीकृत कार्यों पर कार्रवाई शुरू हो चुकी है, जबकि केवल 13 कार्य ही अप्रारंभ हैं।
* मौजूदा वित्त वर्ष में ही 72 कार्य (₹185.10 लाख) स्वीकृत हुए हैं। हाल ही में स्वीकृत कार्यों को समय सीमा के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
* ई-साक्षी पोर्टल पर सैंक्शन, फंड डिस्बर्सल और जियोटैगिंग जैसी नई प्रक्रियाओं के कारण भी तकनीकी चुनौतियां सामने आई हैं।
जमीनी स्तर की व्यावहारिक अड़चनें
संघ ने स्पष्ट किया कि बीडीओ कार्यालय अधिकांश कार्यों का सीधा निष्पादन नहीं करता, बल्कि ये कार्य संबंधित ग्राम पंचायतों के माध्यम से कराए जाते हैं। भूमि की अनुपलब्धता, वन स्वीकृति, एनओसी और पंचायत स्तर की अनिच्छा जैसी बाधाओं के कारण कई बार धनराशि होने के बावजूद कार्य तुरंत शुरू नहीं हो पाते। इसके लिए अकेले बीडीओ को जिम्मेदार ठहराना अनुचित है। इसके अतिरिक्त, मंडी में आई भीषण प्राकृतिक आपदा, राहत व पुनर्वास कार्य, पंचायतों के कार्यकाल की समाप्ति और पंचायत चुनावों की आचार संहिता ने भी विकास की गति को प्रभावित किया है।
संघ ने कहा कि बीडीओ जवाबदेही से पीछे नहीं हटते, लेकिन समीक्षा तथ्यों, जमीनी परिस्थितियों और मर्यादित भाषा के दायरे में होनी चाहिए। बिना तथ्यों के अमर्यादित टिप्पणी की संघ कड़ी निंदा करता है और चेतावनी दी कि यदि भविष्य में अधिकारियों के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने वाली ऐसी स्थिति दोबारा बनी, तो संघ आगामी कदम उठाने के लिए बाध्य होगा।
