अधिवक्ता अधिनियम 1961 में प्रस्तावित संशोधन के खिलाफ प्रदेशभर में वकीलों ने आज अदालतों का पूर्ण बहिष्कार किया। वकीलों का आरोप है कि केंद्र सरकार अधिवक्ता अधिनियम 1961 में संशोधन करने की तैयारी कर रही है।

यह संशोधन वकीलों के हितों को प्रभावित करने वाला होगा। इससे सरकार का न्यायालय में सीधा हस्तक्षेप हो जाएगा। यह संशोधन वकीलों की स्वतंत्रता पर सीधे प्रहार है। नए अधिवक्ता कई साल प्रैक्टिस के बाद कोई केस लेते हैं। किन्हीं कारणों से वह अपना केस हार जाता है और मुवक्किल शिकायत करता है तो उस वकील के खिलाफ जांच बैठ जाएगी।

अधिनियम के तहत वकीलों को कोर्ट के कामकाज से हड़ताल या बहिष्कार करने पर रोक लगेगी। यह वकीलों के संवैधानिक अधिकार का हनन करेगा। इस अधिनियम के बाद झूठी शिकायतें बढ़ेंगी। अधिवक्ताओं ने अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग की। वकील मंगलवार को भी वकील अदालती कार्रवाई में शामिल नहीं होंगे।

