हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव दीपक शर्मा ने मंडी में आयोजित ‘दिशा’ (जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति) की बैठक में सांसद कंगना रनौत द्वारा अधिकारियों के साथ अपनाए गए तीखे रुख पर कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने कहा कि जवाबदेही के नाम पर अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से अपमानित करना, कटाक्ष करना और उनकी कार्यक्षमता पर व्यक्तिगत हमले करना लोकतांत्रिक और प्रशासनिक मर्यादाओं का खुला उल्लंघन है।
दीपक शर्मा ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों की समीक्षा करना और सार्वजनिक धन के उपयोग पर सवाल उठाना जनप्रतिनिधि का अधिकार है, लेकिन ‘दिशा’ जैसी महत्वपूर्ण समिति को राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन या अधिकारियों को नीचा दिखाने का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए।
प्रशासनिक प्रक्रियाओं की समझ होना जरूरी
सांसद निधि के उपयोग पर सवाल उठाने को लेकर कांग्रेस महासचिव ने कहा कि बजट उपलब्ध होना और उसका धरातल पर खर्च होना दो अलग-अलग बातें हैं। किसी भी कार्य के लिए प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृति, विभागीय औपचारिकताएं तथा टेंडर प्रक्रिया अनिवार्य होती है। अधिकारियों पर सवाल उठाने से पहले यह समझना आवश्यक है कि देरी का वास्तविक तकनीकी कारण क्या है। उन्होंने नसीहत देते हुए कहा:
“सवाल पूछिए, लेकिन रिकॉर्ड के आधार पर। देरी पर जवाब मांगिए, लेकिन तथ्यों के आधार पर। जवाबदेही तय कीजिए, लेकिन नियम और प्रक्रिया के अनुसार।”
अधिकारी किसी दल के कार्यकर्ता नहीं
दीपक शर्मा ने कहा कि जनप्रतिनिधि और प्रशासन एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि व्यवस्था के दो महत्वपूर्ण पहिए हैं। अधिकारी किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता नहीं हैं, बल्कि सरकारी तंत्र का हिस्सा हैं और उन्हें भी अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। टकराव के बजाय समन्वय से ही परिणाम संभव हैं।
मंडी की जनता को गुस्सा नहीं, परिणाम चाहिए

सांसद के रवैये पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि मंडी की जनता को गुस्से का प्रदर्शन या राजनीतिक तकरार नहीं, बल्कि सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर ठोस काम चाहिए। लोकतंत्र में गरिमा केवल जनप्रतिनिधियों की नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। जनता को राजनीतिक नाटक के बजाय समयबद्ध विकास और वास्तविक परिणाम चाहिए।
