किसी भी राजनीतिक दल में संगठन का पद जिम्मेदारी, जनसमर्थन और कार्यकर्ताओं के विश्वास का प्रतीक होता है। लेकिन जब नेतृत्व जनभावनाओं से पूरी तरह कट जाए, चुनावी मैदान में बार-बार नकारा जा चुका हो और संगठन के भीतर रहकर ही पार्टी की जड़ें काटने का काम करे, तो पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। सराज युवा कांग्रेस की वर्तमान स्थिति आज इसी त्रासद दौर से गुजर रही है, जहां लगातार चुनावी हार और खुले भीतरघात के बावजूद शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी निष्ठावान कार्यकर्ताओं को कचोट रही है।
जनाधार शून्य: 25,000 मतदाताओं वाले वार्ड में जमानत जप्त
युवा कांग्रेस के कंधों पर पूरे क्षेत्र में पार्टी की नई जमीन तैयार करने का जिम्मा होता है, लेकिन सराज में हकीकत इसके उलट है। संगठन की कमान संभाल रहे युवा कांग्रेस अध्यक्ष का चुनावी ट्रैक रिकॉर्ड जमीनी पकड़ की पोल खोलने के लिए काफी है।
जनता के बीच पकड़ का यह आलम है कि उन्हें दो बार स्वयं चुनावी मैदान में जनता द्वारा पूरी तरह नकारा जा चुका है और एक बार उनकी धर्मपत्नी को भी करारी हार का सामना करना पड़ा है। सबसे शर्मनाक स्थिति जिला परिषद चुनाव के दौरान देखने को मिली, जहां लगभग 25,000 मतदाताओं वाले विशाल वार्ड में युवा कांग्रेस अध्यक्ष की जमानत जप्त हो गई जबकि उनके साथ सराज के दिग्गज कांग्रेसी नेता एवं पूर्व मिल्क फेडरेशन के अध्यक्ष चेतराम का पूरा आशीर्वाद रहता है।
जिस चेहरे को जनता बार-बार मतदान के जरिए खारिज कर रही हो और जो अपने वार्ड में न्यूनतम जनसमर्थन तक न जुटा पाए, उसके ऐसे लचर प्रदर्शन से समूचे क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी की छवि को भारी धक्का पहुंचा है।
भीतरघात की सुनियोजित राजनीति
जब जमीन पर जनाधार नहीं बचा, तो राजनीति का रुख सीधे पार्टी विरोधी गतिविधियों और भीतरघात की ओर मुड़ गया। सराज में सिलसिलेवार ढंग से घटे घटनाक्रम गवाही देते हैं कि किस तरह पार्टी अनुशासन को तार-तार किया गया:
* पंचायती राज चुनाव: जून महीने के चुनावों में जब सराज कांग्रेस मंडल अध्यक्ष जगदीश रेड्डी ने संगठन की मजबूती के लिए अधिकृत प्रत्याशी उतारा, तो युवा कांग्रेस अध्यक्ष पार्टी के साथ खड़े होने के बजाय अपने ही मंडल नेतृत्व और घोषित प्रत्याशी के खिलाफ मैदान में डट गए।
* सीडी कोऑपरेटिव सोसाइटी चुनाव: इसके तुरंत बाद हुए चुनावों में तो विचारधारा से खुला समझौता कर लिया गया। युवा कांग्रेस अध्यक्ष ने खुलकर भाजपा समर्थित उम्मीदवार की मदद की और जीवन भर कांग्रेस का झंडा थामने वाले वरिष्ठ नेता व पूर्व प्रदेश सचिव महेंद्र ठाकुर के खिलाफ षड्यंत्र रचकर कोई कसर नहीं छोड़ी।

पार्टी की चुप्पी: कार्यकर्ताओं का टूटता सब्र
सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह है कि इतना सब होने के बाद भी पार्टी हाईकमान और शीर्ष नेतृत्व इस पर कोई संज्ञान क्यों नहीं ले रहा?
*लगातार तीन बार जमानत जप्त होने के पार्टी की साख गिराने वालों से जवाब-तलब कब होगा?
* क्या मंडल अध्यक्ष के अधिकृत उम्मीदवार का विरोध करना और भाजपा के साथ मिलकर वरिष्ठ नेताओं को हराना अब अनुशासनहीनता नहीं माना जाता?
* जो निष्ठावान कार्यकर्ता दिन-रात कांग्रेस की विचारधारा के लिए जमीन पर पसीना बहाते हैं, क्या उनके समर्पण की कोई कीमत नहीं रह गई है?
कड़े फैसले की दरकार
सराज युवा कांग्रेस का गिरता ग्राफ किसी संयोग का परिणाम नहीं, बल्कि अकर्मण्यता, बार-बार की शर्मनाक चुनावी हार और खुले भीतरघात का नतीजा है। संगठन किसी की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को साधने का जरिया नहीं हो सकता।
यदि प्रदेश व जिला नेतृत्व ने अब भी आंखें मूंदे रखीं और इन पार्टी विरोधी हरकतों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की, तो सराज में कांग्रेस के सच्चे और निष्ठावान कार्यकर्ताओं का मनोबल पूरी तरह टूट जाएगा। संगठन को बचाना है तो अलोकप्रिय और भीतरघाती तत्वों से तुरंत मुक्ति पानी होगी—अब केवल संज्ञान लेने का नहीं, बल्कि आर-पार के कड़े फैसले का वक्त है।
