सराज विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत नैहरा मैहरीधार के अंबेडकर चौक, चुटाबान में आयोजित तीन दिवसीय पारंपरिक ‘नाट मेला’ धूमधाम व भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ संपन्न हो गया। इस मेले में देव परंपरा का निर्वहन करते हुए विशेष रूप से आमंत्रित कांढी कलबाडा के आराध्य देव खुडीजहल जी के आगमन से पूरा माहौल भक्ति घीमय और उल्लासपूर्ण बन गया।

समापन समारोह में अनुसूचित जाति जनजाति अल्पसंख्यक संयुक्त संघर्ष मोर्चा (हिमाचल प्रदेश) के अध्यक्ष हीरामणि भारद्वाज ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। वहीं महेंद्र सिंह भारद्वाज, संजीव कुमार और खेवन सिंह विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। मेला आयोजन समिति के संयोजक एवं पूर्व प्रधान (काकड़ाधार पंचायत) सीताराम चौहान ने मुख्य अतिथि सहित सभी गणमान्य लोगों का पारंपरिक रूप से स्वागत व अभिनंदन किया।
मुख्य अतिथि का संबोधन (ब्लॉक):
मुख्य अतिथि ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे मेले न केवल हमारी समृद्ध देव संस्कृति और लोक परंपराओं को सहेजने का कार्य करते हैं, बल्कि समाज में आपसी भाईचारे और सौहार्द को भी प्रगाढ़ करते हैं।
“बाबा साहेब के दिए समानता के अधिकार की बदौलत आज समाज अपनी आवाज कर रहा बुलंद” — हीरामणि भारद्वाज
मुख्य अतिथि हीरामणि भारद्वाज ने अपने संबोधन में कहा कि विश्व के सर्वश्रेष्ठ संविधान के निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की बदौलत ही आज समस्त अनुसूचित जाति समाज के लोग संगठित होकर इस प्रकार के मेले और उत्सव मना पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि बाबा साहेब ने समानता और समता का संवैधानिक अधिकार न दिया होता, तो आज भी समाज अस्पृश्यता और दंश को झेल रहा होता। पूर्वाग्रह से ग्रसित मानसिकता ने हमारे पूर्वजों को पशु समान जीवन जीने पर विवश कर रखा था। लेकिन संविधान में दिए गए मजबूत प्रावधानों की बदौलत आज अनुसूचित जाति समाज सशक्त होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद कर रहा है।
विशेष कॉलम:
“हर गांव-पंचायत में हों ऐसे आयोजन, ताकि मिले बराबरी का हक” — लीलाधर चौहान |
मेले में विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित AAS 24 News के संस्थापक एवं सामाजिक कार्यकर्ता लीलाधर चौहान ने सफल आयोजन के लिए समिति के संयोजक सीताराम चौहान को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों की हर गांव और पंचायत स्तर पर सख्त जरूरत है, क्योंकि आज भी अनुसूचित जाति समाज के लोगों को कई स्थानों पर समानता का अधिकार नहीं मिल पाता और वे सार्वजनिक मेलों की नाटी तक में खुलकर शामिल नहीं हो पाते। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आजादी के आठ दशक बीत जाने के बाद भी समाज का एक तबका समानता के अधिकार से वंचित होकर सामाजिक कुरीतियों व भेदभाव का दंश झेलने को मजबूर है, जिसे खत्म करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।

मुख्य अतिथि ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे मेले न केवल हमारी समृद्ध देव संस्कृति और लोक परंपराओं को सहेजने का कार्य करते हैं, बल्कि समाज में आपसी भाईचारे और सौहार्द को भी प्रगाढ़ करते हैं।
आयोजक सीताराम चौहान ने बताया कि मेले का मुख्य उद्देश्य गांव के बुजुर्गों का मनोरंजन, ग्रामीणों में आपसी मेलजोल बढ़ाना और ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करना है। समाज के प्रबुद्ध एवं साधन संपन्न वर्ग को जोड़ने का मकसद भी यही है कि वे क्षेत्र के विकास और युवाओं के मार्गदर्शन में सहयोग कर सकें।

मेले के दौरान स्थानीय बच्चों के लिए भाषण व विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इसके साथ ही महिला मंडल निधनी, महिला मंडल मोहनी, महिला मंडल गुननाल और महिला मंडल कंमाद को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था, जिन्होंने अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई। तीन दिवसीय मेले की सांस्कृतिक संध्याओं में हिमाचल प्रदेश के नामी लोक कलाकारों ने पहाड़ी गीतों और नाटियों की शानदार प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
