AAS 24 News के साथ खास बातचीत में साझा किए 25 वर्षों के अनुभव, तालियों (क्लैप) के महत्व और विश्व बंधुत्व पर दिया प्रेरक संदेश

थुनाग (मंडी)

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला थुनाग में आयोजित स्काउट एवं गाइड प्रशिक्षण शिविर में सोमवार (28 सितंबर) को अनुशासन, सेवा और आपसी सौहार्द की अनूठी मिसाल देखने को मिली। शिविर में बतौर मुख्य रिसोर्स पर्सन पहुंचे सेवानिवृत्त अध्यापक रविंद्र सिंह शास्त्री ने 33 विभिन्न स्कूलों से आए छात्र-छात्राओं को स्काउटिंग के व्यावहारिक गुर सिखाए। सेवानिवृत्ति के 11 वर्ष बीत जाने के बाद भी शास्त्री जी बिना किसी स्वार्थ के नई पीढ़ी को खेल-खेल में जीवन का सही मार्ग दिखा रहे हैं।

शिविर के दौरान AAS 24 News के संस्थापक एवं सीएमडी (Founder/CMD) लीलाधर चौहान के साथ हुई विशेष बातचीत में रविंद्र सिंह शास्त्री ने अपने सेवाकाल के संस्मरण साझा किए और बेहद सादगी व विनम्रता के साथ हर सवाल का जवाब देते हुए बच्चों व समाज के नाम एक प्रेरक संदेश दिया।

तालियों (स्काउट क्लैप) का महत्व और विश्व बंधुत्व की सीख

रविंद्र सिंह शास्त्री ने शिविरार्थियों को स्काउट क्लैप (Scout Clap) की बारीकियों और उसके पीछे छिपे मनोवैज्ञानिक व अनुशासनात्मक महत्व के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि स्काउटिंग में ताली केवल उत्साह बढ़ाने का जरिया नहीं, बल्कि ऊर्जा के सही संचार, एकाग्रता और समूह भावना को मजबूत करने का माध्यम है।

अपने मधुर स्वर में बच्चों से संवाद करते हुए उन्होंने कहा कि गले में पहना जाने वाला स्काउट स्कार्फ हर युवा को यह याद दिलाता है कि पूरी दुनिया एक परिवार है। उन्होंने बच्चों को आपसी प्रेम, भाईचारे और निस्वार्थ सेवा भाव के साथ जीवन जीने की प्रेरणा दी।

स्काउट एंड गाइड छात्र एवं छात्राएं

‘बी प्रिपेयर्ड’ का मूल मंत्र और 21 राष्ट्रपति स्काउट्स की विरासत

AAS 24 News से बातचीत करते हुए शास्त्री जी ने बताया कि स्काउट एंड गाइड सेवा में उन्होंने 25 वर्ष दिए हैं और प्री-एएलटी (Pre-ALT) स्तर का प्रशिक्षण पूरा किया है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के सभी 12 जिलों के साथ-साथ देश के लगभग 70 प्रतिशत हिस्से का भ्रमण कर युवाओं में देशभक्ति की अलख जगाई है।

उनकी देखरेख में तैयार हुए 21 बच्चे राष्ट्रपति स्काउट पुरस्कार से नवाजे जा चुके हैं। उन्होंने बड़े गर्व और विनम्रता के साथ कहा:

“मैं भले ही व्यक्तिगत रूप से राष्ट्रपति भवन न पहुंच सका, लेकिन मेरे तराशे हुए तीन शिष्य देश के महामहिम राष्ट्रपति से सम्मानित हुए हैं। एक शिक्षक के लिए इससे बड़ा मान और सम्मान कुछ नहीं हो सकता।”

33 स्कूलों के विद्यार्थियों में दिखा जबर्दस्त उत्साह

थुनाग स्कूल में आयोजित इस शिविर में 33 विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने पूरे मनोयोग से भाग लिया। बिना किसी औपचारिक दबाव के, केवल खेल-खेल में दी जा रही इस ट्रेनिंग से बच्चों के भीतर नेतृत्व क्षमता, आत्मनिर्भरता और विपरीत परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेने का हुनर निखर रहा है।

AAS 24 News परिवार ऐसे समर्पित शिक्षक और समाज-सेवी रविंद्र सिंह शास्त्री के जज्बे को नमन करता है, जो उम्र के इस पड़ाव में भी समाज निर्माण में पूरी निष्ठा से जुटे हुए हैं।

By Leela Dhar Chauhan

LeelaDhar Chauhan (9459200288) MD/Chief Admin AAS 24news email-leeladhar9@gmail.com

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