हिमाचल प्रदेश में सामाजिक न्याय, आरक्षण और संवैधानिक अधिकारों पर हो रहे कथित हमलों के खिलाफ वंचित वर्गों ने लामबंद होने का फैसला किया है। हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने आगामी 26 नवंबर को संविधान दिवस के अवसर पर राजधानी शिमला के अंबेडकर चौक पर एक राज्यस्तरीय ‘संविधान दिवस समारोह एवं सामाजिक एकता सम्मेलन’ आयोजित करने का निर्णय लिया है।

मोर्चा के अध्यक्ष हीरामणि भारद्वाज ने एक विस्तृत अपील जारी करते हुए कहा कि प्रदेश में इस समय ऐसी ताकतें सक्रिय हैं जो सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक व्यवस्थाओं के खिलाफ माहौल बना रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल और सत्ता से जुड़े प्रभावशाली लोग आरक्षण नीति, यूजीसी के सामाजिक न्याय संबंधी प्रावधानों और एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम को कमजोर करने वाली विचारधारा को संरक्षण दे रहे हैं, जिससे सामाजिक सौहार्द को गंभीर खतरा पैदा हो रहा है।

मोर्चा ने सरकारी भर्तियों में आरक्षण नियमों की अनदेखी, कथित अनियमितताओं, विकास निधि का सही उपयोग न होने और वंचित वर्गों के साथ हो रहे भेदभाव पर गहरी चिंता जताई। भारद्वाज ने कहा कि एससी/एसटी विकास निधि के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अलग कानून बनाने में हो रही देरी और राजनीतिक दलों द्वारा इन वर्गों को सिर्फ वोट बैंक समझने की प्रवृत्ति से समाज में गहरा रोष है।

मोर्चा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि 26 नवंबर का यह आयोजन केवल विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे संविधान दिवस के व्यापक संदर्भ में सामाजिक न्याय, आरक्षण की सुरक्षा और संवैधानिक मर्यादाओं की रक्षा के लिए एक साझा एवं सकारात्मक मंच बनाया जाएगा।

मोर्चा ने प्रदेश भर के सामाजिक, कर्मचारी, युवा, महिला संगठनों और प्रबुद्ध नागरिकों से आह्वान किया है कि वे राजनीतिक और क्षेत्रीय मतभेदों से ऊपर उठकर शिमला में जुटने के लिए अपनी लिखित सहमति दें, ताकि एकजुट होकर समानता और बंधुत्व की आवाज को मजबूती दी जा सके।

By Leela Dhar Chauhan

LeelaDhar Chauhan (9459200288) MD/Chief Admin AAS 24news email-leeladhar9@gmail.com

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